हिंदी सिनेमा और हिंदी साहित्य का अन्तर्सम्बन्ध

Authors

  • डॉ. अनीता रानी Author

DOI:

https://doi.org/10.64675/ijmis.v2.i2.2026.02

Abstract

प्रस्तुत शोध-पत्र हिंदी साहित्य और हिंदी सिनेमा के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और कलात्मक अंतर्संबंधों का गहन अनुशीलन करता है। साहित्य और सिनेमा दोनों ही समाज के यथार्थ को प्रतिबिंबित करने वाले दो सशक्त माध्यम हैं, जहाँ साहित्य शब्द और कल्पना के माध्यम से मनुष्य के अंतर्जगत को उद्घाटित करता है, वहीं सिनेमा दृश्य, ध्वनि और तकनीक के सामंजस्य से उसे सेल्यूलाइड पर जीवंत बनाता है। इस शोध का मुख्य उद्देश्य यह विश्लेषित करना है कि किस प्रकार भारतीय सिनेमा के उद्भव (1913) से लेकर 21वीं सदी के डिजिटल युग तक हिंदी साहित्य ने सिनेमा को वैचारिक और कथात्मक सुदृढ़ता प्रदान की है। शोध-पत्र में मुंशी प्रेमचंद, शरतचंद्र चट्टोपाध्याय, फणीश्वरनाथ रेणु, और धर्मवीर भारती जैसे मूर्धन्य रचनाकारों की कृतियों के फिल्मी रूपांतरणों जैसे 'सेवासदन', 'देवदास', 'तीसरी कसम', और 'सूरज का सातवां घोड़ा' का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया गया है। इसके साथ ही, समांतर सिनेमा आंदोलन में साहित्य की भूमिका, पटकथा लेखन की चुनौतियाँ, और दोनों विधाओं के बीच वाणिज्यिक व कलात्मक द्वंद्व पर प्रकाश डाला गया है। निष्कर्षतः यह शोध प्रमाणित करता है कि तकनीकी बदलावों के बावजूद, सिनेमा की आत्मा को जीवित रखने के लिए साहित्यिक गहराई आज भी अपरिहार्य है।


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Published

2026-06-30

How to Cite

डॉ. अनीता रानी. (2026). हिंदी सिनेमा और हिंदी साहित्य का अन्तर्सम्बन्ध. International Journal of Multidisciplinary Innovations & Studies, 2(2), 23-33. https://doi.org/10.64675/ijmis.v2.i2.2026.02